आओ स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें। खुद को तरक्की की राह पर हर दम आगे बढ़ाएं। स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें।। दूसरों से पहले खुद को प्यार करना सिखाएं। खुद की सराहना करके दुनिया में सबसे ऊपर निकल कर दिखाएं। अपनी खूबियों को पहचान कर अपने में आत्मविश्वास जगाए।। खुद को… Continue reading आओ स्वयं को प्यार करके खुद को सराहें
Category: Poems
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माँ
मां का भोला भाला चेहरा याद आता है। उनका ममता भरा स्पर्श याद आता है। दुलार की ठंडी छांव का झोंका याद आता है। उनकी हर बात का हर शब्द याद आता है।। मां की छवि को भुलाया नहीं जा सकता। उनकी यादों को कभी मिटाया नहीं जा सकता। चाहे कितनी भी उंचाइयां छू लीं… Continue reading माँ
पैसा या रुपैया
बाप बड़ा ना भैया। इस दुनिया में सबसे बड़ा रुपैया।। पैसा है इस दुनिया में सबको प्यारा। इसके बिना किसी को भी जीना नहीं गंवारा।। पैसे की चमक इंसान को अंधा बना देती है। उसकी आंखों पर काला नकाब पहना देती है।। कलयुग में पैसे को ही अहमियत है दी जाती। जिसके पास नहीं है… Continue reading पैसा या रुपैया
ऐ राही चला चल
ए राही अपने पथ पर आगे बढ़ता चल। मत डर। निर्भीक होकर अपना काम करता चल।। पर्वत की तरह स्थिर। वायु की तरह द्रुतगति। झरने की तरह निर्मल बन कर सबके दिलों में अपनी जगह बनाता चल। हर खुशी सब पर लुटाता चल।। दुर्गम पथ पर आगे बढ़ता चल मत डर। निर्भीक होकर अपना काम… Continue reading ऐ राही चला चल
फूलों की गुफ्तगू
बाग में सारे फूल मिलकर कर रहे थे संवाद। एक दूसरे के साथ नोकझोंक कर रहे थे विवाद।। गुलाब आगे आकर बोला मैं तो हूं धरती का सबसे सुंदर फूल। मेरे जैसा खुशबु दार कोई और नहीं है फूल।। मेरे फूलों के रस से तरह-तरह के इत्र हैं बनाए जाते। इन सब का उपयोग करके… Continue reading फूलों की गुफ्तगू
(शेरु और वीरु की दोस्ती)
शेरु अपनें मालिक संग एक छोटे से घर में था रहता। अपने मालिक के संग रहकर खूब आनंद से था जीया करता।। शेरू हरदम अपने मालिक के आगे पीछे दुम हिलाता जाता था। उसका मालिक भी उसे देखकर प्रसन्नता से फूला नहीं समाता था शेरु था बहुत ही होशियार। उस से बढ़कर कोई नहीं था… Continue reading (शेरु और वीरु की दोस्ती)
(मानव शरीर के अंग)
हड्डियों और मांस पेशियों से मिलकर बना है यह शरीर। मानव को आकृति प्रदान करने में सहायक होता है यह शरीर।। मांसपेशियां शरीर के हिलने ढुलनें में सहायता है करती। इसके बिना मानव की कोई नहीं हस्ती। मस्तिष्क शरीर के सभी अंगो को नियंत्रित है करता। यह तंत्रियों के माध्यम से है काम करता। हृदय… Continue reading (मानव शरीर के अंग)
(शिमला में बिन मौसम बरसात)
बिन मौसम की की बारिश में ऐ मानव क्या तू दौड़ पाएगा? पल में ठंडक पल में गर्मी क्या तू सह आएगा।। गर्मी के मौसम में आसमान ने बजाई रणभेरी। वर्षा ने आते हुए भी नहीं लगाई देरी।। छम छम वर्षा ने बरस कर पानी बरसाया। बादलों ने भी गरज गरज कर अपना बिगुल बजाया।।… Continue reading (शिमला में बिन मौसम बरसात)
(आज का युग है तेरा हे! नारी शक्ति)
आज का युग है तेरा हे! नारी शक्ति। तुझ में समर्पण की है अद्भूत शक्ति।। इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास से भरा है कोमल ह्रदय तेरा। तुझ पर सब को गर्व है बहुतेरा।। तू अपनी मेहनत के बल पर मुकाम हासिल करती है। अपनी जिंदगी में बदलाव के लिए नींव तैयार करती है।। तू है सृष्टि… Continue reading (आज का युग है तेरा हे! नारी शक्ति)
(वन्दना) प्रार्थना
मेरे प्रभु आओ, अपनी आंखों में तुम को बसाऊं। तेरी शरण में आ कर के बस एक तेरा ही ध्यान मन में लाऊं।। हर दम बस तेरी महिमा के ही गुण गाऊं। तेरा ही स्मरण कर अपनें जीवन को सार्थक बनाऊं।। मेरे प्रभु------ मेरे विकारों को हे प्रभु! जड़ से मिटा देना। अज्ञानता से भूल… Continue reading (वन्दना) प्रार्थना