मजबूत बंधन

शिवानी और रुपेश के परिवार में उनकी छोटी सी बेटी रानी थी। शिवानी ने रुपेश के साथ प्रेम विवाह किया था। वह भी अपने मां बाप के विरुद्ध जाकर। शिवानी के माता-पिता ने उसे कहा था कि तुम ने अगर अपनी इच्छा से शादी करनी है तो हमारे घर के द्वार तुम्हारे लिए सदा के… Continue reading मजबूत बंधन

कब क्यूं और कैसे

तीन दोस्त थे अंकित अरुण और आरभ। तीनों साथ-साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। वह तीनों 12वीं की परीक्षा के बाद पढ़ाई भी कर रहे थे। और नौकरी ढूंढने का प्रयास भी कर रहे थे। उनके माता पिता चाहते थे कि वे नौकरी करके हमारा भी सहारा बने। अंकित अरुण और आरभ तीनों मध्यम वर्गीय… Continue reading कब क्यूं और कैसे

एकता में बल होता है

एक छोटे से गांव में एक वृद्ध दंपति रहते थे। उनके दो बेटे थे। हनी मोटू था। बनी पतला था। हनी सारा दिन खा खा कर अपना पेट भरता था। घर का कोई भी काम नहीं करता था। वह हर काम के लिए अपने छोटे भाई बनी पर, हुक्म चलाया करता था। उसके मां बाप… Continue reading एकता में बल होता है

असली विजेता

स्कूल में पारितोषिक वितरण का आयोजन होने जा रहा था सभी बच्चों को भाषण तैयार करने के लिए कहा गया सभी बच्चे हफ्ते पहले से ही भाषण तैयार करने की भरपूर कोशिश कर रहे थे मैडम ने कहा था कि उसे ही पुरस्कार मिलेगा जो सबसे अच्छा भाषण देगा भाषण के लिए भी 5 मिनट… Continue reading असली विजेता

उड़ान

छवि आज बहुत ही खुश थी। जिस सम्मान को पाने के लिए वह इतनी मेहनत इतना बड़ा संघर्ष करके इस मुकाम तक पहुंची आज अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रही थी। उसके सामने प्रेस के रिपोर्टर और बड़े-बड़े नेता उसके कड़े संघर्ष की कहानी सुनने के लिए उत्सुक थे। उसे आज उसी के एक छोटे… Continue reading उड़ान

वाटिका मेरा स्कूल

रमेश के परिवार में उनका एक बेटा था श्याम। बहुत ही चंचल स्वभाव का था पढ़ाई तो जरा भी नहीं करता था।  उसके पापा जब उसे कहते पढ़ाई करो, पढ़ाई के नाम पर बहुत ही डरता था। जब कभी उसकी मम्मी अपनी सहेली के साथ बड़े से लौन में बैठकर अपनी सहेलियों के साथ गप्पे… Continue reading वाटिका मेरा स्कूल

गिलहरी

मैं हूं गिलहरी मैं हूं गिलहरी। कितनी सुनहरी कितनी रुपहली। छोटे से मन वाली। छोटे से तन वाली।। क्षण में ऊपर। क्षण में नीचे।। फुदक फुदक कर मंडराने वाली। मैं हूं गिलहरी मैं हूं गिलहरी। कुतर कुतर कर फल खाने वाली।। फलमटर और मूंगफली के दानों को खाने वाली। फुदक फुदक कर एक कोने से… Continue reading गिलहरी

बहू

बहू को बेटी की नजर से देखो अरे दुनिया वालो।   बहू में अपनी बेटी को तलाशों दुनिया वालों।। बेटी और बहू में फर्क मत करना। जग में अपनी जग हंसाई मत करना।। जितना प्यार अपनी बेटी को करते हो।   उससे भी वही प्यार करना दोस्तों।। उसको भी वही दुलार देने की कोशिश करना… Continue reading बहू

अनमोल

काशीनाथ आज बहुत खुश थे, इसलिए खुश नजर आ रहे थे क्योंकि आज उनका बेटा स्कूल में प्रथम आया था।कहीं ना कहीं उस की तरक्की  में उनका भी बड़ा योगदान है था काशीनाथ एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। वह फ्लैट उन्होंने अपनी पाई-पाई जमा करके जोड़ा था। घर के बाहर छोटा सा लौन… Continue reading अनमोल

राजू और उसकी दोस्त चिड़िया

राजू के घर के पास एक छोटा सा घोंसला था उस पर गाने वाली चिड़िया रहती थी। वह चिड़िया इतना मीठा गाना सुनाती कि राजू चिड़िया की मधुर गुंजन से भावविभोर होकर घोंसले के पास स्कूल से आकर घंटों बैठा रहता। वह चिड़िया भी उसे बेहद प्यार करती थी जब तक वह उसे दाना नहीं… Continue reading राजू और उसकी दोस्त चिड़िया