वर्षा रानी

दोस्त है मेरी वर्षा रानी।
वह तो है बड़ी मनभावनी।
आनें पर मुझे लुभाती है।
मेरी ओर खिंची चली आती है।
हम दोनों का एक दूजे बिना नहीं है गुजारा।
उस का साथ मुझे भी लगता प्यारा।

आती है जब वर्षा रानी।
बरसाती है पानी।।
मुझ को बाहर है बुलाती।
पानी में है सैर करवाती।।
टपटप बूंदें सभी पर बरसाती हैं।
मुझे खोलनें पर मजबूर हैं करवाती।
काले,भूरे,लाल सभी रंगों में आता हूं।
बच्चे,बूढ़े,युवा सभी को भाता हूं।।
मेरा साथ सभी को लगता है प्यारा।
वर्षा आनें पर मेरे बिना नहीं गुजारा।।
एक पांव और काली धोती।
सर्दी में हर दम हूं सोती।।
गर्मी में छाया हूं करती।
वर्षा में मैं हूं रोती।।
मैं हूं बच्चों रंग बिरंगी प्यारी प्यारी-प्यारी छतरी।।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *