मुन्नी और टुन्नी की तकरार

एक थी बिल्ली मुन्नी रानी।
दूजी थी एक टुन्नी रानी।।
दोनों ने की मिलकर चोरी।
लाई कहीं से एक कचौरी।।
मुन्नी कहती सारी लूंगी।
टुन्नी कहती आधी दूंगी।।

दोनों में फिर हुई लड़ाई।
हाथापाई मार कुटाई।।
देख रहा था दूर से बंदर।
नटखट पूरा एक मछंदर।

मौका पाकर दौड़ा आया।
मुन्नी चुन्नी को धमकाया।।
हाथा पाई में बन्दर नें लाभ उठाया।
कचौरी को चटकारे लगा कर खाया।।
भाग गई वह डर के मारे।
बंदर के थे वारे-न्यारे।।

उसने झट से कचोरी बटोरी।
खा गया पूरी एक कचोरी।
बच्चों आपस में मत लड़ना।
चोरी करके पेट ना भरना।।

जब दो व्यक्ति किसी वस्तु के लिए झगड़ने लगतें हैं तो उन दोनों की हानि होती है।लाभ तो कोई तीसरा ही उठा जाता है। इसलिए हमें आपस में कभी लड़ना नहीं चाहिए।कुछ हानि हुई तो उसे सह कर मेल से रहना चाहिए।

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